hazaaron dardo ko dil men daba rahe hain ham | हज़ारों दर्दोॆ को दिल में दबा रहे हैं हम

  - Shajar Abbas

हज़ारों दर्दोॆ को दिल में दबा रहे हैं हम
हज़ारों ज़ख़्म हैं जिनको छुपा रहे हैं हम

पलट के फिर नहीं आएँगे अब तुम्हारे शहर
शहर से आज अहद कर के जा रहे हैं हम

वो जा रही है किसी और की दुल्हन बनकर
और उसको देख के आँसू बहा रहे हैं हम

तुम्हारी याद दिलाते हैं ये हमें हर दम
तुम्हारे सारे ख़तों को जला रहे हैं हम

ये लग रहा है उस इक शख़्स को गवाँते हुए
कि जैसे दोस्तों दुनिया गवा रहे हैं हम

किया था 'इश्क़ जब हम दोनों ने बताओ हमें
ग़म-ए-फ़िराक़ क्यूँ तन्हा मना रहे हैं हम

किसी ने ख़त में ये अश्कों से लिख के भेजा है
पलट भी आओ ख़ुदारा बुला रहे हैं हम

हमारे दर्द पे देती है दुनिया दाद शजर
ग़ज़ल में हाल-ए-दिल अपना सुना रहे हैं हम

  - Shajar Abbas

Aurat Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Aurat Shayari Shayari