हर सू है ग़म हुसैन अलैहिस्सलाम काऐ मोमिनीन आज है चेहलुम इमाम काआँखों से ख़ूँ के अश्क टपकने लगे शजरआया सफ़र जो याद असीरों को शाम का— Shajar Abbas