
ऐ कनीज़ो आप के सर पर रिदाऐं देख कर
मुब्तिला है ख़ौफ़ में ये दौर-ए-हाज़िर का यज़ीद
आप का ज़ेवर है पर्दा ख़ुद को परदे में रखो
दस्त बस्ता इल्तिजा करते हैं ये तुम से अबीद
— Shajar Abbas
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