अफ़सोस था और होंठों पे मुस्कान खिली थीये इश्क़ की मे'राज थी या ज़िंदा-दिली थीअंगुश्तरी तोहफ़े में उसे इस लिए दी हैवो याद करेगी किसी सय्यद से मिली थी— Shajar Abbas