
ग़म-ए-फ़िराक़ में अपना न ऐसा हाल करे
तमाचे मार के रुख़सार को न लाल करे
उसे ये हक़ है भुला दे मुझे शजर वो अभी
उसे कहो कि वो इस हक़ को इस्तिमाल करे
— Shajar Abbas
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