करते फिरेंगे अब यही फ़रियाद 'इश्क़ में
हम हो गए हैं दोस्तों बर्बाद 'इश्क़ में
नाशाद हो गया है कोई शाद 'इश्क़ में
राँझा हुआ कोई कोई फ़रहाद 'इश्क़ में
करती है क़ैद 'इश्क़ में दुनिया परिंद को
और हम परिंद करते हैं आज़ाद 'इश्क़ में
रह रह के याद करते हैं वो हम को रात दिन
रह रह के उनको करते हैं हम याद 'इश्क़ में
दिल नींद जिस्म जान सूकूँ सब लुटा दिए
ऐसे भी गुज़रे हैं कई जव्वाद 'इश्क़ में
तारीख़-ए-इश्क़ ने ये बताया हमें शजर
करता नहीं है कोई भी इमदाद 'इश्क़ में
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