हमदम बुरा नहीं कहो हरदम नसीब कोग़म ग़म पे ही तो मिलते हैं हर ग़म नसीब कोकहता नहीं नसीब को हमदम कभी बुराकम मिलते ग़म जो थोड़े से मुझ कम नसीब को— Shajar Abbas