जब जब भी उस को याद 'शजर' मेरी आएगीमातम करेगी ग़म में वो आँसू बहाएगीमिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब थाबाद-ए-फ़िराक सब को ये मिसरा सुनाएगी— Shajar Abbas