याद है माज़ी का हर लम्हा मुझे अच्छे सेमैं ने जब पहली दफ़ा माँ की दुआएँ ली थींउस ने होंठों से मिरा चूमा था माथा बढ़करउस ने हाथों से शजर मेरी बलाएँ ली थीं— Shajar Abbas