
बहकी बहकी इन फ़ज़ाओं ने शराबी कर दिया है
लब गुलों के चूम कर मौसम गुलाबी कर दिया है
मैं महकने को महक सकता हूँ ख़ुशबूदार भी हूँ
चाहतों ने फूल मुझ को पर किताबी कर दिया है
— Dipanshu Shams
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