बदल कर रख दी उस ने ज़िन्दगी मेरी
कि हालत हो गई है जौन सी मेरी
मैं उस दिन मर गया जिस दिन कहा उस ने
भुला दो मुझ को गर चाहो ख़ुशी मेरी
वो ख़ुश है बिन मेरे ये देख दिल ख़ुश है
अब उस की हर ख़ुशी है आशिक़ी मेरी
तुम्हारा राम बन पाया नहीं मैं पर
तुम्हें ही मानता हूँ जानकी मेरी
तुम्हारा नाम लूँ मैं हर ग़ज़ल में बस
यहीं ख़्वाहिश है 'चंदन' आख़िरी मेरी
— Manoj Sharma "Chandan"















