मुझे यूँँ देख के अक्सर ही सोचे वीराँ फ़लक
पड़ा हुआ है ज़मीं पर ये कब से वीराँ फ़लक
तुम्हें यक़ीं है ख़ुदा का कोई वजूद नहीं
तभी तो देखते हो ज़िक्र-ए-रब पे वीराँ फ़लक
क़ुबूल हो भी गईं हों तो कैसे जानूँगा
निगल गया है दुआएँ सभी ये वीराँ फ़लक
हैं बनती जोड़ियाँ ऊपर ये मान लूँ कैसे
कि जब भी देखा है तारे ही तोड़े वीराँ फ़लक
सितारों में झलक आएगी शक़्ल अपनों की
बस इस उमीद में ही नज़रें देखे वीराँ फ़लक
कहीं से 'ओहदे में मालिक से कम नहीं है ‘सफ़र’
कि झेलता है ये नाले सभी के वीराँ फ़लक
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