सब हसरत-ओ-मुराद का मुँह बंद कर दिया
लो मैं ने हर फ़साद का मुँह बंद कर दिया
वरना तो ये ज़रर भी भटकता मेरी तरह
अच्छा हुआ मफ़ाद का मुँह बंद कर दिया
देखा उसे किसी को दु'आओं में माँगते
फिर अपनी ही मुराद का मुँह बंद कर दिया
तेरे दिए ख़तों को दबा कर किताब में
जा मैं ने तेरी याद का मुँह बंद कर दिया
धोका फ़रेब झूठ के तकिए के ज़ोर से
लोगों ने एतिमाद का मुँह बंद कर दिया
आज़ाद ज़िंदगी को किया ओढ़ के क़फ़न
यूँ मैं ने हर फ़साद का मुँह बंद कर दिया
ये मेरी होशियारी थी जो इश्क़ देख कर
झट से दिल-ए-कुशाद का मुँह बंद कर दिया
उस ने भवों से कर के शरारत इशारों में
मुझ जैसे कज-निहाद का मुँह बंद कर दिया
है कौन उस की याद का रुख़ जो बदल रहा
क्यूँ मेरी जायदाद का मुँह बंद कर दिया
वो राज़ खोल दे न ‘सफ़र’ के कहीं सभी
सो उस सफ़र-नज़ाद का मुँह बंद कर दिया















