मेरी जान दे दे अब तू मेरी जान को रिहाईतेरे चोंचलों में फँस कर हुई कितनी जग-हँसाईमेरे दिल को क्यूँ तड़प दी नहीं गर था मुझ से मिलनाया तड़प को ही मिटा दे या मिटा ये ना-रसाई— Shivam Yadav