कुछ तो ख़ुदा इशारा दो
इस आसमाँ को तारा दो
काली सियाह रातों को
सूरज सा उजियारा दो
तैर रही इस कश्ती को
ठहरा हुआ किनारा दो
जाँ से ज़्यादा प्यार करे
इतना कोई प्यारा दो
— Shivangi Shivi
इस आसमाँ को तारा दो
काली सियाह रातों को
सूरज सा उजियारा दो
तैर रही इस कश्ती को
ठहरा हुआ किनारा दो
जाँ से ज़्यादा प्यार करे
इतना कोई प्यारा दो
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