"राम"

राम आज रह गए धरम के नारों के
नहीं हैं इंसानों में बिकते हैं गलियों में गारों के
उलझ गए हैं राम राजनैतिक हथकंडों में
बंधे हुए हैं राम मजहबी झंडों में

वचन के आगे राजपाठ ठुकराने वाले
धर्म की असली परिभाषा समझाने वाले
राम त्याग की मूरत हैं पहचानो
मानवता की वे सूरत हैं पहचानो

राम जीवन जीने का एक पाठ पढ़ाने आए थे
वो भगवान बनने नहीं तुम को राम बनाने आए थे

— Shobhit Dixit

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