चैन आया नहीं कभी दिल को
इज़्तिराबी रही वही दिल को
मुफ़लिसी कम नहीं हुई इस की
दौलत ए इश्क़ भी मिली दिल को
सब के आती नहीं समझ लेकिन
सब के छूती है शा'इरी दिल को
— Sumit Panchal
इज़्तिराबी रही वही दिल को
मुफ़लिसी कम नहीं हुई इस की
दौलत ए इश्क़ भी मिली दिल को
सब के आती नहीं समझ लेकिन
सब के छूती है शा'इरी दिल को
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