तू ने किया क्या है इन्हें और क्या नहीं है

अब एक लड़का और पहले सा नहीं है

उस को मेरी चाहत है, पर चाहत ही है बस
वो मुझ को अपना लेगा ये लगता नहीं है

वो जान कहता है तो क्या उस की हुई मैं
वो जान अपनी तो किसे कहता नहीं है

तू तो गई, पर सब को भड़काया भला क्यूँ
अब बा'द तेरे कोई याँ आता नहीं है

जब नाक पे ग़ुस्सा चढ़ेगा तब कहेगी
जाओ मुझे तुम से कोई शिकवा नहीं है

मैं ने बता कर तुझ को छोड़ा था सनम, तब
ये मेरा समझौता हुआ धोखा नहीं है

तू इश्क़ करने में बड़ा माहिर है, हाँ पर
तू इश्क़ करने में अभी मुझ सेा नहीं है

— BR SUDHAKAR

More by BR SUDHAKAR

Other ghazal from the same pen

See all from BR SUDHAKAR →

Narazgi Shayari

Shers of narazgi.

All Narazgi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling