मैंने तो ये सोचा था बस अच्छा होगा
पर मालूम नहीं था मुश्किल रस्ता होगा
वो लड़की हाँ बोलेगी दिल कहता है मेरा
पर फिर दिल ही कहता है क्या ऐसा होगा
जब ख़ुद मैं नहीं हस पाया हूँ हिजरत के बाद
तो फिर ये मुमकिन है वो भी रोता होगा
अब जिस हालत में हूँ मैं जो रुतबा है मेरा
उसको भूल ही जाना शायद अच्छा होगा
आज मेरे दिल की धड़कन कुछ बढ़ सी गई है
शायद वो भी मुझको याद ही करता होगा
इस लिए छोड़ गया है कोई 'सलीम' तुझे भी
तूने भी किसी को कभी ऐसे ही छोड़ा होगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by BR SUDHAKAR
our suggestion based on BR SUDHAKAR
As you were reading Berozgari Shayari Shayari