पहले सी शान ढूॅंढ कर ले आ

मेरी पहचान ढूॅंढ कर ले आ

बादशाहत की जिस को फ़िक्र न हो
ऐसा सुलतान ढूॅंढ कर ले आ

जीव निर्जीव में न समझे भेद
नेक इंसान ढूॅंढ कर ले आ

इश्क़ की ख़ुश्बू जिस से आती न हो
ऐसा दीवान ढूॅंढ कर ले आ

तेरा मेरा हो सबका एक ख़ुदा
सबका भगवान ढूॅंढ कर ले आ

क़ैद 'ताहिर' को गरचे करना है
दिल का ज़िंदान ढूॅंढ कर ले आ

— Tarun Bharadwaj

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Gunaah Shayari

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