पहले सी शान ढूॅंढ कर ले आ
मेरी पहचान ढूॅंढ कर ले आ
बादशाहत की जिसको फ़िक्र न हो
ऐसा सुलतान ढूॅंढ कर ले आ
जीव निर्जीव में न समझे भेद
नेक इंसान ढूॅंढ कर ले आ
'इश्क़ की ख़ुश्बू जिस सेे आती न हो
ऐसा दीवान ढूॅंढ कर ले आ
तेरा मेरा हो सबका एक ख़ुदा
सबका भगवान ढूॅंढ कर ले आ
क़ैद 'ताहिर' को गरचे करना है
दिल का ज़िंदान ढूॅंढ कर ले आ
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