"और मुलाक़ात हो गई"
अरे माँ बाबा आप आ गए,और बताएँ कैसे हो
मैं जन्नत में ख़ुश थी तब से , आप बताएँ कैसे हो
बताओ ना दुनिया कैसी है , क्या जन्नत के जैसी है
क्या वहाँ भी नदियाँ झूले है, या आज भी जहन्नुम जैसी है
बोलो ना आप चुप क्यूँ हो, क्या मुझ में ऐसी बुरी बात मिली
पैदा होने से पहले ही मार दिया, क्यूँ क़त्ल की मुझे सौग़ात मिली
क्यूँ काटा-पीटा टुकड़े किया, और कचरे में फेंक दिया
पर शुक्र है उस ख़ुदा का, मुझे लेने एक फ़रिश्ता भेज दिया
अब आप को जन्नत कैसे ले जाऊँ, वो जहाँ का ख़ालिक़ बवाल करता है
किस जुर्म में मेरा क़त्ल हुआ , ऐसा मुझ से सवाल करता है
जाओ ना उसे जवाब दो, फिर हम जन्नत साथ चले
वहाँ झुला झूलेंगे सब मिल कर, करते हुए चलो बात चले
शुक्र है इस जहाँ में तो, मेरी आपसे बात हो गई
मैं ने अपने क़ातिल को देखना चाहा , और मुलाक़ात हो गई















