सुनो अब आई है बारी हमारी
बहुत सी बात है बाक़ी हमारी
कहीं पर ढेर दुख है लाद आई
किसी को भा रही शादी हमारी
उसी के जैसा कोई ढूँढ़ने में
कटी यूँ ज़िन्दगी आधी हमारी
हैं की तो कोशिशें यूँ आँख से पर
अभी उतरी नहीं लाली हमारी
किसी की आँख पर आँसू सजे हैं
कहीं पर रच गई मेहँदी हमारी
यही सिगरेट थोड़ी चाय ग़ज़लें
यही शय रह गईं साथी हमारी
— Sarvesh Pandey















