"उन की यादें"

जिन के यादों में दिन गुज़ारे हैं
वो पूछते हैं आप हमारे हैं
उन के चौखट पे अबत क बैठे हैं
जो हमें ख़्वाब में पुकारे हैं
जिस दिल में बसर था मेरा
उस घर के अब लगते किराए हैं
आज मैं ने पुराने दोस्तों को भी बुलाया हैं
आज पुराने दोस्त भी लग रहे पराए हैं
उस के एक दिल में कई लोग आ गए थे
सो हम ख़ुद ही उस दिल से निकल आए हैं
आजहीं बिछड़ना था उस से
आज ही वो हँसी बनकर आए हैं

— Vikash krishiv

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