इक आरज़ू थी वो भी अधूरी ही रह गईअब तो कहानी मेरी कहानी ही रह गईनिकले थे शहर ख़्वाब को तकमील करने हमवापस हुए जो घर तो जवानी ही रह गई— Waseem Siddharthnagari