ham to apna sab kuchh kho kar uske bistar se aaye the | हम तो अपना सब कुछ खो कर उसके बिस्तर से आए थे

  - ALI ZUHRI

हम तो अपना सब कुछ खो कर उसके बिस्तर से आए थे
मत पूछो कैसे उन नाज़ुक लम्हों से बच के आए थे

अब तक आती है कपड़ों से उस जिस्म-ए-अतहर की ख़ुश्बू
हम जिसकी बाँहों में वो दिलकश रात बिता के आए थे

कैसे कह दें हम कैसी थी उसके होंटो की वो नेमत
हम जिसके होंटो से मय की मदहोशी ले के आए थे

हम ने चाहा था वो लैला मेरी बदनाम न हो लेकिन
हम तो धोके में उसका गेसू कॉलर पे ले आए थे

मेरी यादों में ही तो उसके हाथों से रिसता था खूँ
हम ही तो उसके खूँ से ताज़ा गजलें ले के आए थे

  - ALI ZUHRI

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