"आदम"
मैं ख़ुदा का तराशा हुआ आदम हूँ
तू मुझ से निकली हुई जान कोई
मैं तेरी ख़ातिर जन्नत से निकला हूँ
तू जो करती नहीं इब्लीस से बात कोई
मैं बर्रे सगीर में भटकता फिरा हूँ
तू वही जो निकली नहीं अरब से बाहर कोई
— ALI ZUHRI
मैं ख़ुदा का तराशा हुआ आदम हूँ
तू मुझ से निकली हुई जान कोई
मैं तेरी ख़ातिर जन्नत से निकला हूँ
तू जो करती नहीं इब्लीस से बात कोई
मैं बर्रे सगीर में भटकता फिरा हूँ
तू वही जो निकली नहीं अरब से बाहर कोई
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