रेत ही रेत मिली इश्क़ सफ़र में मुझ कोज़िंदगी ख़ाक हुई और मिला कुछ भी नहींरात भर होता है तारी किसी वहशत का गुमाँरात ख़्वाबों की सियाहत के सिवा कुछ भी नहीं— ALI ZUHRI