ज़िंदगी से डर गया है
इस क़दर कोई थका है
हार कर दुनिया से तेरी
तेरे ही दर पे पड़ा है
आदमी ने आदमी से
मौत का सौदा किया है
कौन रखता ध्यान मेरा
धोका तो सब ने दिया है
आपकी झूटी क़सम ने
झूट को भी सच किया है
— Karan Shukla
इस क़दर कोई थका है
हार कर दुनिया से तेरी
तेरे ही दर पे पड़ा है
आदमी ने आदमी से
मौत का सौदा किया है
कौन रखता ध्यान मेरा
धोका तो सब ने दिया है
आपकी झूटी क़सम ने
झूट को भी सच किया है
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