subah aayegi | "सुब्ह आएगी"

  - Karan Shukla

"सुब्ह आएगी"

फिर कोई ज़िंदगी की सुब्ह आएगी
धूप फिर से बिखर कर खिलखिलाएगी

ये जो सूखी पड़ी है ज़िंदगी की ज़मीं
एक दिन तेरी मेहनत से भीग जाएगी

हुआ ही क्या है जो तुम इतना उदास हो
इस सफ़र में ऐसी वैसी बातें तो आएँगी जाएँगी

धैर्य रखो अभी समय है ही नहीं अपना
ये दर दर की ठोकर ही तुमको जिताएगी

भरोसा रखना ख़ुद पर और ख़ुदा पर तुम
तेरी कीर्ति जहाँ में एक दिन लहलहाएगी

ये जो है ख़ाली अधूरापन भर जाएगा
फिर एक अजूबा ज़िंदगी में हो जाएगा

सोचे बैठे होंगे बुरा तुम यूँँ जिसे
हादसा ही वो तुमको एक दिन हँसा जाएगा

  - Karan Shukla

Mazdoor Shayari

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