ये दिल फिर किसी से भी जोड़ा नहीं
मैं टूटा हूँ पर ख़ुद को तोड़ा नहीं
तेरे कहने पे तुम को बस छोड़ा है
मगर मैं अभी तुम से बिछड़ा नहीं
हाँ लिखकर जो पन्ना दिया था तू ने
उसे आज़ तक मैं ने मोड़ा नहीं
अभी राह में रात काली है पर
चमकना कभी मैं ने छोड़ा नहीं
कई तारे थे छत के ऊपर मेरे
उन्हें देखा पर उन को तोड़ा नहीं
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