"सवाल"उदासियों के सफ़र मेंजानाँ तुम्हारी यादों के सारे ज़र्रेमैं अंदरूँ से उठा-उठा करगुज़िश्ता लम्हों की रह-गुज़र परबिखेरता हूँसमेटता हूँतुम ही बताओये सारे ज़र्रेमेरे ही दश्त-ए-वुजूद के हैंया फिर तुम्हारी नमूद के हैं— ZARKHEZ