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Nazm

"द लास्ट गुडबाय"

शाम की ख़ामोशी में
इज़्तिराब भरने को
शोर पैदा करने को
उस की कॉल आई है

कह रही है वो मुझ से
ठीक ही हुआ है सब
ख़ुश बहुत हूँ शादी से
आख़िरी दफ़ा लेकिन
मुझ को तुम से मिलना है

सोचता हूँ मैं कह दूँ
आख़िरी दफ़ा देखो
मिल चुका हूँ मैं पहले
और अब के मिल कर भी
क्या कहोगी तुम आख़िर
फिर वही गिले शिकवे
क्या कमी थी रिश्ते में
क्यों जुदा हुए थे हम

बात मुख़्तसर कर लो
तुम जहाँ हो जैसी हो
ज़िंदगी बसर कर लो

पर मैं हामी भरता हूँ
मैं उसे ये कहता हूँ
हाँ मैं मिलने आता हूँ
इक उदास कैफ़े में

इक उदास कैफ़े में
आ मिले हैं हम फिर से
सामने वो बैठी है
चाय पी रहे हैं हम
चाय पीते देख उस को
था अजब सुकूँ पहले

था अजब सुकूँ पहले
जब वो हँस के कहती थी
मुझ को मिल गए हो तुम
मुझ को मिल गया है सब

चाय पी रही है वो
और मैं ख़यालों में
घिर चुका हूँ वहशत से

वहशतों से घिर कर मैं
सोचने लगा हूँ ये
खो दिया उसे मैं ने
खो दिया है मैं ने सब

अब न चाहने पर भी
उस से पूछ बैठा हूँ
क्यों जुदा हुए थे हम
क्या कमी थी पहले जो
पूरी कर चुकी हो तुम
आज भी तो देखो ना
मेरे सामने हो तुम

और वो हँस के कहती है

बात मुख़्तसर कर लो
तुम जहाँ हो जैसे हो
ज़िंदगी बसर कर लो

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