मैं पिछली मोहब्बत की शिद्दत का मारा ज़रा एहतियात अब ज़ियादा करूँगा
कि शायद ही अब उस क़दर दिल को अपने किसी के लिए मैं कुशादा करूँगा
अभी कल ही मैं ने इरादा किया था कि बस अब मैं उस को भुला दूँगा यक्सर
पर आज उस को फिर याद करने लगा हूँ सो हाँ आज फिर से इरादा करूँगा
मुझे इस ज़माने के आशिक़ बताएँ कि क्या इतना कमज़ोर है इश्क़ अब का
कि ये इश्क़ पुख़्ता तभी होगा जब मैं पिया का बदन बे-लिबादा करूँगा
अगरचे मैं पुर-हौसला तो बहुत हूँ मगर अपनी क़िस्मत से वाक़िफ़ भी हूँ मैं
सो मुझ को न यूँ हार ही माननी है न मैं जीत जाने का वादा करूँगा
मुझे तेरे होने न होने से क्या है तू जान-ए-ग़ज़ल थी मिरी और रहेगी
कभी वस्ल से काम लेता था तेरे और अब हिज्र से इस्तिफ़ादा करूँगा















