" उस का नसीब "
नसीब लिखने वाले ने क्या कमाल लिखा है
ज़मीर पे मेरे धब्बा उसे रुमाल लिखा है
मुरीद हूँ मैं शिक्षा का मज़ीद ज्ञान नहीं है
जवाब मुश्किल हो ऐसा उसे सवाल लिखा है
लपेट देती है मेरा फ़ुज़ूल बात अगर हो
दिमाग़ सुंदरता में भी उसे बवाल लिखा है
मुराद मेरी है उस से अगर विवाह अभी हो
नसीब में मेरे याराँ उसे निहाल लिखा है
फ़रीद है वो शुभ उस शख़्स का जवाब नहीं है
हयात के रंगों में भी उसे गुलाल लिखा है
— Shubham Rai 'shubh'















