
प्रेम होता बुरा तो जताते नहीं
पास चल कर के तुम भी तो आते नहीं
राम को जानकी प्रिय न होती अगर
सिंधु के बीच पुल फिर बनाते नहीं
भाव ही देखते है सभी का प्रभु
वर्ना शबरी के झूठन वो खाते नहीं
चाहते वो कि माया में उलझे रहो
पाठ गीता का फिर वो सुनाते नहीं
— Shubham Rai 'shubh'















