
रौंद कर सपना किसी का मुस्कुराना ठीक नईं
हाकिमों के हाँ में हाँ यूँ भी मिलाना ठीक नईं
अब निकलकर आ गए तो लौटना मुमकिन न है
हारना तो ठीक है पर हार जाना ठीक नईं
— Aatish Alok
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