चलो माना भुलाएँगे, भुलाएँगे मगर कैसे
बिताए पल मिटाएँगे, मिटाएँगे मगर कैसे
ज़रूरत हर घड़ी रहती है हमको एक दूजे की
बिछुड़ के भी निभाएँगे, निभाएँगे मगर कैसे
परेशानी हमारी हैं कि हमको याद सारे हैं
ख़तों को हम जलाएँगे, जलाएँगे मगर कैसे
लब-ओ-लहजा बता देगा कि बीमारी हुई क्या है
मुहब्बत को छुपाएँगे, छुपाएँगे मगर कैसे
हो दूरी गर तो आवाज़ें सुनाई ही नहीं देती
ज़रूरत पे बुलाएँगे, बुलाएँगे मगर कैसे
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