vo jiske naam se dil be qaraar apna hai | वो जिसके नाम से दिल बे क़रार अपना है

  - Ajeetendra Aazi Tamaam

वो जिसके नाम से दिल बे क़रार अपना है
उसी के नाम से रौशन दयार अपना है

ख़ुदा करे न किसी का भी उस तरह यारों
के जिस तरह से बदन तार तार अपना है

हमीं न जाने कहाँ खो गये ज़माने में
हमें किसी का नहीं इंतिज़ार अपना है

के दुश्मनी ही नहीं जिस सेे उस सेे क्या शिकवा
वो जिसने घाव दिये बार बार अपना है

जब अपने दिल ने ही रुस्वा किया सर-ए-महफ़िल
तब और कौन भला राज़ दार अपना है

न एक पल को हुआ आजतक जुदा दिल से
सिवाय दर्द के कौन और यार अपना है

किसी भी हाल में ख़ुद से करो न समझौता
उसूल अपने हैं यारों वक़ार अपना है

  - Ajeetendra Aazi Tamaam

Gham Shayari

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