कौन शजर को तोड़ गया वीरानी में
एक परिंदा रखना था निगरानी में
इस रिश्ते को इतना भी आसान न कर
ज़्यादा मुश्किल होती है आसानी में
शहज़ादी के हिस्से में भी दुख आए
बदलूँगा उस का किरदार कहानी में
होंठ मेरे आज़ाद हुए सहराओं से
और ख़ुदा ने प्यास मिला दी पानी में
— Abhishar Geeta Shukla















