पहले से पैरहन मिरा इतना उदास और
फिर पैरहन के हुस्न पे दुख का लिबास और
क्या ख़ुद-कुशी सभी को ये आवाज़ देती है
आ पटरियों के पास आ थोड़ा सा पास और
दोनों को मत मिलाइये आँखें हो या शराब
सहरा की प्यास और है दरिया की प्यास और
आगे भी काट लेंगे तेरे बिन ये ज़िंदगी
जब इतनी पी चुके हैं तो इक दो गिलास और
उन आँसुओं ने छोड़ दी होंठों पे कुछ नमी
या'नी शहद से जुड़ गई गुड़ की मिठास और
— Abhishar Geeta Shukla















