vikat baadh ki karun kahaanii nadiyon ka sannyaas likha hai | विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है

  - Adam Gondvi

विकट बाढ़ की करुण कहानी नदियों का संन्यास लिखा है
बूढ़े बरगद के वल्कल पर सदियों का इतिहास लिखा है

क्रूर नियति ने इसकी किस्मत से कैसा खिलवाड़ किया है
मन के पृष्ठों पर शाकुंतल अधरों पर संत्रास लिखा है

छाया मदिर महकती रहती गोया तुलसी की चौपाई
लेकिन स्वप्निल स्मृतियों में सीता का वनवास लिखा है

नागफनी जो उगा रहे हैं गमलों में गुलाब के बदले
शाखों पर उस शापित पीढ़ी का खंडित विश्वास लिखा है

लू के गर्म झकोरों से जब पछुआ तन को झुलसा जाती
इसने मेरे तनहाई के मरुथल में मधुमास लिखा है

अर्धतृप्ति उद्दाम वासना ये मानव जीवन का सच है
धरती के इस खंडकाव्य पर विरहदग्ध उच्छ्वास लिखा है

  - Adam Gondvi

Qismat Shayari

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