तीरगी है रौशनी है
ख़ूब-सूरत ज़िन्दगी है
कुछ नहीं है पास मेरे
बस ज़रा दीवानगी है
कल तलक़ तो यार थे पर
आज उन से दुश्मनी है
आँख उस की देख लूँ तो
ख़ुद निकलती शा'इरी है
हो सके तो प्यार बाँटो
साँस केवल दो घड़ी है
— Adarsh Akshar
ख़ूब-सूरत ज़िन्दगी है
कुछ नहीं है पास मेरे
बस ज़रा दीवानगी है
कल तलक़ तो यार थे पर
आज उन से दुश्मनी है
आँख उस की देख लूँ तो
ख़ुद निकलती शा'इरी है
हो सके तो प्यार बाँटो
साँस केवल दो घड़ी है
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