दिल तुम सेे कर चुका है हमेशा की यारियाँ
फिर क्यूँ चला रहे हो मिरे दिल पे आरियाँ
किस को सुनाएँ कौन सुनेगा हमारियाँ
धर लेगा हाथ कान पे सुन बे-क़रारियाँ
जो लोग मुझ कबीर को क़ातिल बुला रहे
करते फिरेंगे याद मिरी दस्त-कारियाँ
इंसान हो परिंद हो शैतान या ख़ुदा
सब की निभा रहे हैं हमीं ज़िम्मेदारियाँ
इस को सुना रहे कभी उस को सुना रहे
क्यूँ कर रहे हैं लोग मिरे ग़म की ख़्वारियाँ
तुझ को मुझे कोई भी यहाँ जानता नहीं
मशहूर इस क़दर हैं तिरी मेरी यारियाँ
अब क्या बताएँ तुझ को मोहब्बत की दास्ताँ
रातों को तेरी याद में चलती हैं आरियाँ
इतना बता दे बस तू अगर बाग़बान है
फूलों के साथ सूख रहीं क्यूँ ये क्यारियाँ
हर शख़्स की ज़बाँ पे तिरा मेरा नाम है
मशहूर हो गई हैं तिरी मेरी यारियाँ















