क्या बताएँ तुझे क्या करते हैं

ज़िंदगी ख़ुद से जुदा करते हैं

मैं तो ख़ुर्शीद से भी बढ़कर हूँ
सब मिरे साथ चला करते हैं

जो ये कहते नहीं हैं हम आशिक़
वही छुप-छुप के मिला करते हैं

तुम मिरे पास में बैठी तो हो
मुझ से सब लोग जला करते हैं

देख लो मेरी तरह लोग यहाँ
बड़ी मिन्नत से मिला करते हैं

जो तिरे सामने तेरी कहते
पीठ पीछे वो दग़ा करते हैं

वो न करते हैं किसी से भी वफ़ा
जो ज़माने से वफ़ा करते हैं

हम किसी से नहीं कहते कुछ भी
हाँ ज़माने से गिला करते हैं

हम मोहब्बत तो नहीं करते हैं
हाँ मोहब्बत का गिला करते हैं

— Prashant Kumar

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