" गुलज़ार साहब के नाम"

आज के दिन ही दीना में
जन्म हुआ गुलज़ार का सुन
याद में उन की पेश किया
अफ़साना गुलज़ार का सुन

बचपन में ही जुदा हुए थे
वो अपने घर वालों से
दिल में उन्होंने क्या बतलाऊँ
दर्द हज़ारों पाले थे
फिर भी उन के जीने के
सब अंदाज़ निराले थे
हाल सुनाया है बस मैं ने
लफ़्ज़ों में गुलज़ार का सुन
आज के दिन ही दीना में
जन्म हुआ गुलज़ार का सुन
याद में उन की पेश किया
अफ़साना गुलज़ार का सुन

घर से निकले जीते रहे
ऐसे ही तन्हाई में
भूखे प्यासे चलते रहे
धूप कड़ी पुरवाई में
ख़ून-पसीना एक किया
जीवन की गहराई में
ऐसे हासिल थोड़ी हुआ
नाम उन्हें गुलज़ार का सुन
आज के दिन ही दीना में
जन्म हुआ गुलज़ार का सुन
याद में उन की पेश किया
अफ़साना गुलज़ार का सुन

माँ का लाड़ मिला उन को
न ही पिता का प्यार मिला
समझा पराया अपनों ने
ऐसा उन्हें घर द्वार मिला
तुम क्या जानो जीवन में
उन को क्या किरदार मिला
हँस के निभाया हर रिश्ता
जीवन के किरदार का सुन
आज के दिन ही दीना में
जन्म हुआ गुलज़ार का सुन
याद में उन की पेश किया
अफ़साना गुलज़ार का सुन

गीतों का गुलशन चमका
क़लमों की हरियाली से
झूम उठी थी शहनाई
उन के सुरों की लाली से
उन की क़लम के चर्चे तुम
सुन लो हर दिलवाले से
राज़ रहेगा दुनिया की
क़लमों पे गुलज़ार का सुन
आज के दिन ही दीना में
जन्म हुआ गुलज़ार का सुन
याद में उन की पेश किया
अफ़साना गुलज़ार का सुन

सुख में दुख में साथ दिया
अपनाया था राखी को
जग में फिर मशहूर किया
कितनों की आवाज़ों को
ढूँढ़ रहा हूँ महफ़िल में
आज उन के अफ़साने को
हर फ़नकार पे कर्म हुआ
राखी के गुलज़ार का सुन
आज के दिन ही दीना में
जन्म हुआ गुलज़ार का सुन
याद में उन की पेश किया
अफ़साना गुलज़ार का सुन

— Prashant Kumar

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