ज़िंदगी बेशुमार रस्ते हैं
ख़ुद को मुझ से गुज़ार रस्ते हैं
एक रस्ता है सिर्फ़ मस्जिद को
मय-कदे को हज़ार रस्ते हैं
काफ़िला मर रहा है सुनने को
बोल दे शह-सवार रस्ते हैं
इश्क़ ने ही कहा था मूसा को
हो जा दरिया के पार रस्ते हैं
इस इलाके में एक शाइ'र है
इस लिए सोगवार रस्ते हैं
— Ahmad Abdullah















