''साक्षात्कार''
तुम से बात करने से
इतना डर क्यूँ रहा हूँ मैं
कौन है मेरे अंदर
जो मुझे डरा रहा है
मैं तो मुहफ्ट हुआ करता था
इतना कि दिल में बात के उठने
और मुँह तक आने में ज़रा भी
देर नहीं लगती थी
उस पर मुसीबत तो ये है
कि तुम मेरी सब से अच्छी दोस्त हो
और हद ये
कि तुम से हर बात कह देता हूँ
जो किसी से आज तक नहीं कहा, वो भी
कुछ नहीं कहा है तो वो
जो सब से ज़्यादा ज़रूरी लगता है
जिसे कहने कि नाकाम कोशिश आज भी
जारी है
तुम से कहूँ, ये सोचने भर से
मेरे शब्द लड़खाड़ाने लगते हैं
जैसे इजहार नहीं
साक्षत्कार के लिए जा रहा हूँ
— Ajit Yadav














