jo tere dard se aa.e the jaan baaki hain | जो तेरे दर्दस आए थे जान बाक़ी हैं

  - ''Akbar Rizvi"

जो तेरे दर्दस आए थे जान बाक़ी हैं
मेरे वो क़ल्ब पे सारे निशान बाक़ी हैं

अभी तो चंद ही देखे हैं ज़िंदगी तूने
ना जाने कितने अभी इम्तिहान बाक़ी हैं

खिलाफ़-ए-ज़ुल्म भी हक़-गोई से नहीं डरते
जहाँ में ऐसे कई हम ज़बान बाक़ी हैं

जो आँच आने नहीं देंगे सर ज़मीं तुझ पर
हमारे मुल्क में वो नौजवान बाक़ी हैं

किसी दरख़्त पे आएँगी मुश्किलें कैसे
के जब तलक ये तेरे बाग़बान बाक़ी हैं

जो रिश्ते देख के दौलत नहीं किया करते
वो बा वक़ार अभी ख़ानदान बाक़ी हैं

गुलों से जिसके निकलती है ख़ुशबू-ए-ईमाँ
ज़मीं पे ऐसे कई गुलसितान बाक़ी हैं

उजाड़ने को चली आँधियाँ मगर अकबर
ख़ुदा का शुक्र है सारे मकान बाक़ी हैं

  - ''Akbar Rizvi"

Aah Shayari

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