davaa us haath men aakar asar karne lagii hai | दवा उस हाथ में आकर असर करने लगी है

  - Ankit Yadav

दवा उस हाथ में आकर असर करने लगी है
के जैसे दूर वो जाकर असर करने लगी है

उसे मालूम है उसपे तो मैं यूँँ भी फ़िदा हूँ
मगर वो ज़ुल्फ़ बिखरा कर असर करने लगी है

बताया था उसे मैने कि है फूलों से नफरत
तभी से फूल भिजवाकर असर करने लगी है

मुझे तो क़त्ल कर देता उसी क़ातिल का ख़ंजर
वो ज़हरी पान खिलवा कर असर करने लगी है

बड़ी शातिर है वो ये जानती है मेरी हाँ है
मगर वो अपनी ना–ना कर असर करने लगी है

दुआ दी थी किसी ने की मिरी हो 'उम्र लंबी
मिरी झूठी क़सम खा कर असर करने लगी है

  - Ankit Yadav

Zulf Shayari

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