ajnabi sa ik sitaara hooñ main sayyaaron ke beech | अजनबी सा इक सितारा हूँ मैं सय्यारों के बीच

  - Aleena Itrat

अजनबी सा इक सितारा हूँ मैं सय्यारों के बीच
इक जुदा किरदार हूँ अपने ही किरदारों के बीच

फिर रही हूँ बे-सबब पागल हवा सी जा-ब-जा
धुँद में लिपटे हुए ख़ामोश कोहसारों के बीच

इस हिसार-ए-ख़ाक को जब तोड़ कर निकलूँगी मैं
ढूँडते रह जाओगे तुम मुझ को दीवारों के बीच

कुछ कड़े टकराओ दे जाती है अक्सर रौशनी
जूँ चमक उठती है कोई बर्क़ तलवारों के बेच

शक्ल ये बेहतर है लेकिन पुख़्तगी के वास्ते
आओ मिटी को रखें कुछ देर अँगारों के बीच

  - Aleena Itrat

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